गाजा मे प्रतिरोध समूहों को मिटाना चाहता है यूएई

गाजा में फिलिस्तीनी प्रतिरोध पर काबू पाने के लिए इजरायल से अधिक यूएई को है जल्दी!

राजनयिक सूत्रों ने संयुक्त अरब अमीरात के एक संदेश का खुलासा किया है जिससे पता चलता है कि गाजा में फिलिस्तीनी प्रतिरोध समूहों को नष्ट करने के लिए अबू धाबी को इजरायल की तुलना में अधिक जल्दी है।

इन सूत्रों के मुताबिक, अबू धाबी का मानना है कि गाजा के खिलाफ इजरायल के युद्ध का लंबा खिंचना इजरायल के साथ यूएई की क्षेत्रीय योजनाओं के लिए खतरा है और साथ ही यह क्षेत्र की स्थिरता और स्थापना को नुकसान पहुंचाता है।

इन सूत्रों ने बताया कि यूएई अपनी वाणिज्यिक और आर्थिक योजनाओं में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। साथ ही यह देश आर्थिक योजनाओं में यथासंभव भाग लेकर अपने क्षेत्रीय प्रभाव का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है, चाहे वह फिलिस्तीनियों के खून की कीमत पर ही क्यों न हो!

गाजा में फिलिस्तीनी प्रतिरोध India-Middle East-Europe Shipping and Railway Connectivity Corridor

गाजा में फिलिस्तीनी प्रतिरोध समूह और संयुक्त अरब अमीरात के आर्थिक हित

पर्यवेक्षकों का मानना है कि गाजा के खिलाफ इजरायल के युद्ध ने संयुक्त अरब अमीरात की कई क्षेत्रीय योजनाओं पर भारी प्रभाव डाला है। इन योजनाओं में सबसे अहम आर्थिक गलियारे की योजना है जिसे भारत और यूरोप के बीच बनाया जाना है, साथ ही ” प्रगति और विकास” योजना है जिसे इराक के दक्षिण में फ़ॉ बंदरगाह से तुर्की के उत्तर तक बनाया जाना है।

क्षेत्र में मौजूदा तनाव और इन दो योजनाओं के लिए यूएई जिस उलटी नीति का इस्तेमाल कर रहा है वह क्षेत्र में इस देश के हितों को नुकसान पहुँचाने वाला है। विशेष रूप से अस्थिरता और युद्ध का अनिश्चित दृष्टिकोण और इसके दायरे के विस्तार की संभावना, यह सभी चीज़ें यूएई के आर्थिक हितों के लिए खतरा हैं।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक,एक तरफ़ गाजा पट्टी में चल रहा युद्ध और फारस की खाड़ी के देशों, तुर्की और भारत के साथ इजराइल के संबंधों की अस्पष्ट स्थिति और दूसरी तरफ इन देशों का एक-दूसरे के साथ संबंध एक खतरा यूएई के लिए खतरा है। संयुक्त अरब अमीरात, जो विकास और प्रगति परियोजनाओं में प्रवेश करके और खुद को इन योजनाओं की मुख्य पार्टी के रूप में पेश करके, पूर्व और पश्चिम के हितों के पर खेलना।

इस संदर्भ में, संयुक्त अरब अमीरात, भारत और यूरोप के बीच आर्थिक गलियारा परियोजना के मुख्य दलों में से एक के रूप में, भारत, इज़राइल, यूरोपीय संघ और सऊदी अरब के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। और इस संबंध में वह प्रयास कर रहा है कि अबू धाबी और वाशिंगटन के बीच जो मतभेद पैदा हुए हैं वे न्यूनतम स्तर पर रहें।

पर्यवेक्षकों के अनुसार, इराक और तुर्की के बीच प्रगति और विकास योजना में भाग लेने की यूएई की इच्छा अबू धाबी के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है, क्योंकि यह चीन की वैश्विक “बेल्ट एंड रोड” परियोजना का हिस्सा है, जिसका पहला चरण है 2028 में परिचालन में लाया जाना है।

लेकिन भारत और यूरोप का आर्थिक गलियारा अभी भी कागज पर एक योजना है, जिसे यूएई लागू करने की कोशिश कर रहा है, जो पूर्व और पश्चिम के बीच संतुलन स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण कारक है।

इराक़-तुर्की-यूएई आर्थिक कॉरीडोर

यूएई ने की इजरायल पर हमास के हमले की निंदा!

जो कुछ भी कहा गया है, उसके कारण यूएई ने हाल ही में गाजा पर इजरायल के आक्रमण और फिलिस्तीनियों, विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं की बड़े पैमाने पर हत्या में इजरायल का पक्ष लिया है, और न केवल उनकी हत्याओं में इस शासन का समर्थन किया है, बल्कि यह भी चाहता है कि जितनी जल्दी संभव हो गाजा में फिलिस्तीनी प्रतिरोध गुटों विशेषकर हमास का सफाया कर दिया जाए।

इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में संयुक्त अरब अमीरात के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्री ने हमास के ऑपरेशन को “अपराध” बताया और युद्धविराम का आह्वान किया।

सुरक्षा परिषद में अपने भाषण के एक हिस्से में उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर को हमास के हमले क्रूर और जघन्य हमले हैं और उन्होंने इजरायली बंधकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की।

इसके अलावा, अल-अक्सा तूफान ऑपरेशन के शुरूआती दिनों के दौरान, संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने इजरायल के विदेश मंत्री एली कोहेन और इस शासन के विपक्ष के नेता यायर लैपिड के साथ एक फोन कॉल में गाजा पट्टी के फिलिस्तीनियों और गाजा में फिलिस्तीनी प्रतिरोध के विरुद्ध इजरायल के युद्ध में समर्थन और एकजुटता व्यक्त की थी।

साथ ही यूएई के विदेश मंत्रालय ने एक बयान प्रकाशित कर हमास द्वारा इजरायली सैनिकों के अपहरण पर गहरा असंतोष व्यक्त किया था।

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